क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं – Class 9 science chapter 2 in hindi notes

इस पोस्ट में हम Bihar board Class 9 science chapter 2 in hindi notes Solutions हमारे आस-पास के पदार्थ के बारे में चर्चा कर रहे हैं। यदि आपके पास इस अध्याय से संबंधित कोई प्रश्न है तो आप कमेंट बॉक्स में टिप्पणी करें

यह पोस्ट बिहार बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। इसे पढ़ने से आपकी पुस्तक के सभी प्रश्न आसानी से हल हो जायेंगे। इसमें सभी पाठों के अध्यायवार नोट्स उपलब्ध कराये गये हैं। सभी विषयों को आसान भाषा में समझाया गया है।

Class 9 science chapter 2 in hindi notes

ये नोट्स पूरी तरह से NCERTऔर SCERT बिहार पाठ्यक्रम पर आधारित हैं। इसमें विज्ञान के प्रत्येक पाठ को समझाया गया है, जो परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इस पोस्ट को पढ़कर आप बिहार बोर्ड कक्षा विज्ञान के किसी भी पाठ को आसानी से समझ सकते हैं और उस पाठ के प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं।

क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं – Class 9 science chapter 2 in hindi notes

 पदार्थ :-  एक प्रकार का द्रव्य है जो कि भौतिक प्रक्रमों द्वारा अन्य प्रकार के द्रव्य में पृथक नहीं किया जा सकता है । एक शुद्ध पदार्थ एक ही प्रकार के कणों का बना होता है ।

अर्थात :- वह वस्तु जो स्थान घेरता हो और जिसका द्रव्यमान हो वह पदार्थ कहलाता है |

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शुद्ध पदार्थ: वह पदार्थ जिसमे मौजूद सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के हो तो वह वैज्ञानिक दृष्टि से शुद्ध पदार्थ कहलाता है | अर्थात शुद्ध पदार्थ एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बना है | 

मिश्रण :-  मिश्रण एक पदार्थ है जो दो या अधिक तत्वों अथवा यौगिकों का , ( रासायनिक रूप से संयुक्त हुए बिना ) बना होता है । उदाहरण :- वायु

 मिश्रण के प्रकार :-  मिश्रण दो प्रकार के होते हैं ।

  1. समांगी मिश्रण 
  2. विषमांगी मिश्रण

1. संमागी मिश्रण :-  वे मिश्रण जिनमें पदार्थ परस्पर पूर्ण रूप से मिश्रित होते हैं और एक दूसरे से अविभेद्य होते हैं , संमागी मिश्रण कहलाते हैं ।  सम्पूर्ण द्रव्यमान में एक समान संघटन होता है । 
उदाहरण :- जल में शर्करा और ( चीनी ) का विलयन संमागी मिश्रण है ।

2. विषमांगी मिश्रण :- वे मिश्रण जिसमें पदार्थ पृथक रहते हैं और एक पदार्थ छोटे कणों , छोटी – छोटी बूँदों अथवा बुलबुले के रूप में , दूसरे पदार्थ में हर जगह फैला रहता है , विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं ।  विषमांगी मिश्रण में , उसके पूरे द्रव्यमान में एक – सा संघटन नहीं होता है ।

उदाहरण :- शक्कर ( चीनी ) और बालू ( रेत ) का मिश्रण एक विषमांगी मिश्रण है क्योंकि इस मिश्रण के विभिन्न भागों में शक्कर और बालू का भिन्न – भिन्न मिश्रण संघटक होगा । 

द्रवों में ठोसों के निलम्बन ( Suspension ) भी विषमांगी मिश्रण है ।

विलयन :- विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है । उदाहरण :- नींबू जल , सोड़ा जल आदि विलयन के उदाहरण हैं ।

विलयन के प्रकार :- किसी विलयन को दो भागों विलायक और विलेय में बाँटा जाता है । 

क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं - Class 9 science chapter 2 in hindi notes

विलयन = विलायक + विलेय 

  • विलायक :- विलयन का वह घटक जो अधिक मात्रा में उपस्थित होता है , विलायक कहलाता है ।
  • विलेय :- विलयन का वह घटक जो कम मात्रा में उपस्थित होता है विलेय कहलाता है । 

विलयन के गुण :-विलयन एक समांगी मिश्रण है । विलयन के कण व्यास में 1nm से भी छोटे होते हैं । इसलिए वे आँख से नहीं देखे जा सकते हैं । 

  • अपने छोटे आकार के कारण विलयन के कण , गुजर रही प्रकाश की किरण को फैलाते नहीं हैं । इसलिए विलयन में प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता । 
  • छानने की विधि द्वारा विलेय के कणों को विलयन में से पृथक् नहीं किया जा सकता है । विलयन को शांत छोड़ देने पर भी विलेय के कण नीचे नहीं बैठते हैं , अर्थात् विलयन स्थाई है ।

विलयन की सान्द्रता :- किसी विलयन के प्रति लीटर आयतन में घुले विलेय पदार्थ की मात्रा को ही विलयन की सान्द्रता कहते हैं ।

  • संतृप्त विलयन :- दिए गए निश्चित तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ नहीं घुलता है तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं ।
  • असंतृप्त विलयन :- यदि एक विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्तता से कम है तो इसे असंतृप्त विलयन कहा जाता है ।
  • अतिसंतृप्त विलयन :- यदि विलयन में विलेय पदार्थ की सान्द्रता , संतृप्त स्तर से अधिक हो तो उसे अतिसंतृप्त विलयन कहते हैं ।

निलम्बन :- निलम्बन एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलेय पदार्थ के कण घुलते नहीं , अपितु माध्यम की समष्टि में निलम्बित रहते हैं । ये निलम्बित कण आँखों से देखे जा सकते हैं ;जैसे- आटा जल मिश्रण , बालु जल आदि ।

निलंबन के गुणधर्म :-

  • यह एक विषमांगी मिश्रण है । 
  • ये कण आँखों से देखे जा सकते हैं । 
  • ये निलंबित कण प्रकाश की किरण को फैला देते हैं , जिससे उसका मार्ग दृष्टिगोचर हो जाता है । 

जब इसे शांत छोड़ देते हैं तब ये कण नीचे की ओर बैठ जाते हैं अर्थात निलंबन अस्थायी होता है । छानन विधि द्वारा इन कणों को मिश्रण से पृथक् किया जा सकता है ।

कोलॉइड :- वह विलयन जिसमें कणों का आकार 1nm से 1000nm के बीच हो , कोलॉइड कैहलाता है । जैसे:- स्टार्च विलयन , दूध , रक्त आदि ।

कोलाइड के गुणधर्म :-यह एक विषमांगी मिश्रण है । 

  • कोलाइड के कणों का आकार इतना छोटा होता है कि ये पृथक् रूप में आँखों से नहीं देखे जा सकते हैं । 
  • जब इनको शांत छोड़ दिया जाता है तब ये कण तल पर बैठते हैं अर्थात् ये स्थायी होते हैं । 
  • ये छानन विधि द्वारा मिश्रण से पृथक् नहीं किए जा सकते । किंतु एक विशेष विधि अपकेंद्रीकरण तकनीक द्वारा पथक् किए जा सकते हैं ।
  • ये इतने बड़े होते हैं कि प्रकाश की किरण को फैलाते हैं तथा उसके मार्ग को दृश्य बनाते हैं ।

कोलाइडल विलयन के संघटक : 

परिक्षिप्त प्रावस्था (dispersed Phase): विलेय पदार्थ की तरह का घटक या परिक्षिप्त कण जो की कोलाइडल के रूप में रहता है उसे परिक्षिप्त प्रावस्था कहते है | अर्थात विलेय कणों को परिक्षिप्त प्रावस्था कहते है | 

परिक्षेपण माध्यम (Dispersing Medium): वह घटक जिसमे परिक्षिप्त प्रावस्था निलंबित रहता है, परिक्षेपण माध्यम कहते है | अर्थात विलायक जिसमें ये पूरी तरह से वितरित रहते है, उसे परिक्षेपण माध्यम कहते है | 

टिण्डल प्रभाव :- कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश की किरणों का फैलना टिण्डल प्रभाव कहलाता है । 

 मिश्रण को पृथक करने के तरीके :-

  1. वाष्पीकरण
  2. अपकेन्द्रीकरण
  3. पृथक्करण
  4. उर्ध्वपातन
  5. क्रोमेटोग्राफी
  6. आसवन
  7. क्रिस्टलीकरण
  • 1. वाष्पीकरण का  मूल उद्देश्य :- मिश्रण के दो पदार्थों में से एक पदार्थ का वाष्पीकरण होना ( जैसे एक पदार्थ का क्वंथनांक दूसरे से कम होता है ।
    अनुप्रयोग : 
    • (i)  समुद्री जल से नमक प्राप्त करने में |
    • (ii)  जल से काले रंग की स्याही को अलग करने में |
  • 2. अपकेन्द्रीकरण का मूल उद्देश्य ( सिद्धान्त ) :- कणों या पदार्थों के घनत्व के कारण पृथक्करण जब किसी पदार्थ को तेजी से घुमाया जाता है तो ( denser particle ) भारी कण नीचे की तरफ दबाव डालते हैं तथा हल्के कण ऊपर चले जाते हैं ।
    अनुप्रयोग : 
    • (i)  जाँच प्रयोगशाला में रक्त और मूत्र के जाँच में |
    • (ii)  डेयरी तथा क्रीम से मक्खन निकालने की प्रक्रिया में |
    • (iii)  कपडे धोने की मशीन में |
  • 3. पृथक्करण कीप का मूल सिद्धान्त :- दो अघुलनशील द्रव ( जो दोनों एक साथ नहीं घुल सकते ) को आसानी से पृथक्करण कीप द्वारा अलग कर सकते हैं । में पृथक्कारी कीप का स्टॉप कार्क खोलने से पानी दूसरे बीकर में इकट्ठा कर सकते हैं तथा दूसरे बीकर में बचा तेल इकट्ठा कर सकते हैं ।
    अनुप्रयोग: ‘
    • (i) तेल तथा जल के अघुलनशील मिश्रण को पृथक करने में |
    • (ii) धातुशोधन के दौरान लोहे को पृथक करने में |
  • 4. उर्ध्वपातन विधि का मूल सिद्धान्त :- दो पदार्थों के बीच एक पदार्थ उर्ध्वपातित हो जाता है ( सीधे ठोस से गैस में परिवर्तित हो जाना ) जबकि दूसरा ऐसे ही रहता है ।
    अनुप्रयोग :
    • (i)  अमोनियम क्लोराइड और नमक के मिश्रण को अलग करने में |
    • (ii) कपूर और लोहे के बुरादे को अलग करने में | 
  • 5. क्रोमेटोग्राफी का मूल सिद्धान्त :- किसी मिश्रण में रंगीन यौगिक , रंजित कणों को पृथक कर सकते हैं । किसी सोखने वाले फिल्टर पेपर की सहायता से जब पानी ( या किसी भी विलयन ) के कण ऊपर की ओर दो अलग – अलग रंग के साथ जाते हैं तो क्रोमेटोग्राफी पेपर द्वारा दोनों पृथक हो जाते हैं । क्योंकि दोनों रंग अलग – अलग गति से सोख लिये जाते हैं ।
    अनुप्रयोग : 
    • (i) डाई में रंगों को अलग करने में |
    • (ii) प्राकृतिक रंगों से पिगमेंट को पृथक करने में |
    • (iii) रक्त से नशीले पदार्थों को अलग करने में |
  • 6. आसवन विधि का मूल सिद्धान्त :- दो संघटकों के बीच एक का क्वथनांक दूसरे से कम होता है । यह विधि दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों को अलग करने के लिए किया जाता है ।
    अनुप्रयोग : 
    • (i)  वायु से विभिन्न गैसों का पृथक्करण |
    • (ii) पेट्रोलियम उत्पादों को उनके विभिन्न घटकों का पृथक्करण |
  • 7. क्रिस्टलीकरण का मूल सिद्धान्त :- किसी मिश्रण से अशुद्धियों को दूर करने के लिए पहले किसी उपयुक्त विलयन में घोलना और क्रिस्टलीकरण द्वारा एक संघटक को पृथक करना ।
    अनुप्रयोग : 
    • (i)  समुद्री जल से प्राप्त नमक को शुद्ध करने में |
    • (ii) अशुद्ध नमूने से फिटकिरी को पृथक करने में | 

भौतिक परिवर्तन :- वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ की अवस्थाओं का अन्तः रूपान्तरण तो होता है , परन्तु पदार्थ के संघटन तथा रासायनिक प्रकृति में कोई परिवर्तन नहीं होता , भौतिक परिवर्तन कहलाता है ।
जैसे :- जल का नमक में घुलना , बल्ब जलना , मोम का पिघलना, पेड़ों को काटना, बर्फ़ का पिघलना, जल का साधारण नमक में घुलना, फलों से सलाद बनाना आदि |

रासायनिक परिवर्तन :- वे परिवर्तन जिनमें एक या अधिक पदार्थ , किसी अन्य पदार्थ में परिवर्तित हो जाते हैं , रासायनिक परिवर्तन कहलाता है । 
जैसे :- लोहे पर जंग लगना , कार्बन का जलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाना, भोजन का पचना, भोजन का पकना, लोहे पर जंग लगना, सब्जियां काटने से चाकू का रंग बदलना लकड़ी एवं कागज का जलना आदि |  । 

भौतिक परिवर्तन और रासायनिक परिवर्तन में अंतर: 

क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं - Class 9 science chapter 2 in hindi notes
क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं - Class 9 science chapter 2 in hindi notes

तत्व :- पदार्थ का वह मूल रूप , जिसे रासायनिक अभिक्रिया द्वारा अन्य सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता है , तत्व कहलाता है । जैसे :- सोडियम , ताँबा , लोहा आदि ।

तत्वों का वर्गीकरण :- तत्वों को धातु , अधातु तथा उपधातुओं में वर्गीकृत किया जाता है । 

  • धातु :- वे तत्व जो सामान्य अभिक्रियाओं में अपने परमाणुओं से एक अथवा अधिक इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं , धातु कहलाते हैं । जैसे :- ताँबा , लोहा , चाँदी आदि ।

धातुओं के गुणधर्म : 

  1. ये चमकीली होती है | 
  2. ये ताप और विद्युत की सुचालक होती है | 
  3. धातुएँ अघातवर्ध्य और तन्य होती है | 
  4. ये ध्वानिक (प्रतिध्वनिपूर्ण ) होती है | 

अधातुओं के गुणधर्म :

  1. ये चमकीली नहीं होती है |
  2. ये ताप और विद्युत की कुचालक होती है |
  3. अधातुयें अघातवर्ध्य और तन्य नहीं होती है |
  4. ये ध्वानिक (प्रतिध्वनिपूर्ण ) नहीं होती है |
  • अधातु :- वे तत्व , जो सामान्य अभिक्रियाओं में दूसरे तत्वों के परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं अधातु कहलाते हैं । जैसे :- ऑक्सीजन , क्लोरीन , आयोडीन , ब्रोमीन आदि ।
  • उपधातु :- कुछ तत्व धातु और अधातु के बीच के गुणों को दर्शाते हैं जिन्हें उपधातु कहते हैं । जैसे :- बोरॉन , सिलिकन , जर्मेनियम आदि ।

धातु, अधातु और उपधातु में अंतर :-

धातुअधातुउपधातु
चमकदार होती हैं। अघातवर्ध्य होती हैंचमकदार नहीं होतीआघातवर्ध्य नहीं होती है।ऐसे तत्व धातु और अधातु के बीच के गुणों को दर्शाता हैं।
तन्य होती है अर्थात धातुओं को खींचकर तार बनाये जा सकते हैं।तन्य नहीं होता है।सोनोरस नहीं होती है।कुचालक है।बोरोन, सिलिकॉन जरमेनियम
सोनोरस या ध्वानिक होती है। ये उष्मा तथा विद्युत की सुचालक है।उदाहरण, सोना, लोहा इत्यादि(सिवाय ग्रेफाइट) ऑक्सीजन और फास्फोरस

यौगिक :- वह पदार्थ जो दो या दो से अधिक तत्वों के नियत अनुपात में रासायनिक तौर पर संयोजन से बनता है यौगिक कहलाता है । जैसे :- चीनी , नमक , जल आदि ।

मिश्रण तथा यौगिक में अन्तर :-

मिश्रण यौगिक
तत्व या यौगिक केवल मिश्रण बनाने के लिए मिलते हैं ।एक पदार्थ क्रिया करके नए पदार्थ का निर्माण करते हैं । 
कोई नया पदार्थ नहीं बनता है ।नये पदार्थ का संघटन सदैव स्थाई होता है ।
किसी नए पदार्थ का निर्माण नहीं करते ।अपने द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित अनुपात में ही एक साथ मिलते हैं ।
संघटन परिवर्तनीय होता है ।नये पदार्थ के गुण धर्म पूरी तरह भिन्न होते हैं ।
मिश्रण में उपस्थित घटक अपने गुण धर्मों को दर्शाते हैं ।घटकों को केवल रासायनिक या वैद्युत रासायनिक प्रक्रिया द्वारा ही पृथक किया जा सकता है ।
घटकों को भौतिक विधियों द्वारा सुगमता से पृथक किया जा सकता है ।

तत्व यौगिक में अन्तर:

तत्व यौगिक
इनमें सिर्फ एक ही प्रकार के परमाणु पाए जाते है | इनमें दो या दो से अधिक प्रकार के परमाणु पाए जाते है
इन्हें नहीं तो भौतिक और नहीं रासायनिक विधियों से ही अलग किया जा सकता है | इन्हें सिर्फ रासायनिक विधियों के द्वारा अलग किया जा सकता है
ये पदार्थों के मूल रूप होते है |  ये तत्वों से बने नए पदार्थ होते है | 

About the author

My name is Najir Hussain, I am from West Champaran, a state of India and a district of Bihar, I am a digital marketer and coaching teacher. I have also done B.Com. I have been working in the field of digital marketing and Teaching since 2022

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